Sunday, June 1, 2014

‘चोर बाजार’

शोर बाजार बन गया‘चोर बाजार’


Traditional Market
दक्षिण मुंबई में भिंडी बाजार इलाके में पुरानी इतिहासकालीन सामानों के कलेक्शन के रुप में चोर बाजार फेमस है। इसे भारत का सबसे बड़ा कबाड़ी बाजार भी कहा जाता है। इसकी खासियत यह है कि जब आपको कोई सामान पूरे मुंबई में नहीं मिलेगा वह यहां जरूर मिल जाएगा। चाहे गाड़ी के पार्ट हों या शिल्प कला के नमूने। वह भी साधारण कीमत में।

कैसे पड़ा नाम

चोर बाजार का नाम पड़ने के पीछे का तर्क भी एकदम अलग है। चोर बाजार का असलियत में नाम शोर बाजार था क्योंकि इस बाजार में शोर बहुत होता था लेकिन उस समय अंग्रेज इसका शुद्ध उच्चारण नहीं कर पाते थे। वह इसे शोर के बदले चोर नाम से बुलाने लगे जिससे इसका नाम ‘शोर बाजार’से ‘चोर बाजार’ हो गया।



सेंकेंड हेंड माल का बाजार

चोर बाजार में ज्यादातर सेकंड हेंड माल मिलते है। इस बाजार में चोरी के समान बिकने की बात भी सामने आती है। यहां पर लोग पुराना सामान बेच सकते हैं। यानी खरीदारी के साथ यह सेल पॉइंट भी है। चोर बाजार प्राचीन और पुरानी वस्तुओं के लिए प्रसिद्ध है। 

भाव से रहें सतर्क

यहां माल खरीदते समय हमेशा भाव को लेकर सावधान रहें। दुकानदार के झांसे में आकर कहीं आपकी जेब से ज्यादा पैसे ना निकल जाएं। वैसे तो यहां के दुकानदार भरोसेमंद होते है। अगर आप कोई महंगी वस्तु खरीदना चाहते हैं, तो उसका भी इंतजाम है, आपको अलग जगह पर जाकर खरीदारी करनी पड़ेगी। यहां के दुकानदार बाहर के लोगों खासकर पर्यटकों से ज्यादा कीमत वसूलते हैं।

फिल्म इंडस्ट्री का ठिकाना

चोर बाजार में फिल्म इंडस्ट्री से लोग प्राचीन और पुरानी वस्तुओं लेने आते हैं। कई सारे फिल्म्स में यहां के सामान उपयोग किए जाते हैं। इस बाजार में अपनी दुकान लगाने वाले खालिद शेख कहते हैं कि यहां पर हर रोज हजारों लोग आते है कुछ लोग घूमने तो कुछ लोग सामान खरीदने आते हैं। इस बाजार की खासियत इसकी अनोखी वस्तुएं हैं, जो लोगों को आकर्षित करती है। मैं खुद यहां पर कई सालों से अपना व्यापार कर रहा हूं। यहां पर सिर्फ पुरानी वस्तुएं ही नहीं मिलते है बल्कि नई भी मिलती हैं। आमिर खान खुद भी कुछ दिन पहले यहां पर आ चुके है अपने फिल्म की कुछ वस्तुएं लेने। वहीं बाजार से सामान लेने वाले मोहसिन कहते हैं कि यहां पर बाइक के बेहद पुराने पार्ट मिल जाते हैं। जिसके लिए मुझे पूरे मुंबई में घूमना पड़ता है, वह मुझे यहां आसानी से मिल जाते हैं। यहां से अक्सर सामान लेकर जाता हूं।

दुकानें: 150 दुकानें

समय: सुबह 11 बजे से शाम 7.30 तक।

शुक्रवार को खास

यह बाजार खास तौर पर शुक्रवार को ही लगता है। इस दिन यहां काफी संख्या में लोग आते हैं। दुकानों के बाहर रोड पर भी सामान लगाकर रखा जाता है। अल सुबह से ही यहां शुक्रवार को बाजार लग जाता है। यहां पर पुरानी घड़ियां से लेकर हस्तशिल्प, गाड़ियों के पार्ट, कपड़े, जूते के अलावा बहुत कुछ मिल जाता है। मूर्तियां, मोबाइल, जिम के सामान से लेकर हर कुछ। 

प्रस्तुति: विनय सिंह



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