104 वर्ष का चिर युवा
ढ़ती उम्र जब सांसों पर भारी पड़नी लगी हो 104 की उम्र में स्वतंत्रता सैनानी राम हर्ष सिंह आज भी उसी बिंदासपन व जिंदादिली और अपनी शर्तों पर जिंदगी बिता रहे हैं। उनके इस जज्बे और हौसले को देश में तो सम्मान मिला ही है, वे विदेश में भी पुरस्कृत हुए हैं। सबसे नया है पिछले महीने नाइजीरिया सरकार द्वारा मिला सम्मान। तीन महीने की यात्रा पर नाइजीरिया गए राम हर्ष ने पूरा देश घूमकर वहां देखा और वहां के लोगों को शुद्ध भारतीय जीवन-शैली के नुस्खे बांटे।
आजादी की लड़ाई के दौरान राम हर्ष सिंह 5 वर्ष जेल में बंद रहे। स्वतंत्रता सेनानी के तौर पर राष्ट्रपति द्वारा सम्मानित हो चुके हैं वे। साथ में कई अन्य पुरस्कारों के विजेता भी हैं। मूलत: बनारस के राम हर्ष इन दिनों मुलुंड में हैं।

राष्ट्रपति भवन में सम्मानित होते राम हर्ष सिंह।
उम्र के इस दौर में भी रोबीली मूंछों वाले सिंह का जोश युवाओं को मात देता है। खासकर क्रिकेट का शौक। पहला मौका मिलते ही अपने से पीढ़ियों छोटे लोगों के साथ वे जुट जाते हैं कलाइयों का जादू दिखाने। घूमने के शौक में भी कोई कमी नहीं है। जैसे-जैसे समय बीतता गया राम हर्ष और अधिक स्वतंत्र होते गए। किसी पर बोझ बने या उसका सहारा लिये बिना।
आज भी अपने सारे निजी काम वे स्वयं ही करते हैं और बहुत धैर्य और जिम्मेदारी से अपने सभी वादों को पूरा करते है। रोज सुबह 5 बजे उठेंगे और व्यायाम और योग करेंगे। आज इस उम्र में भी उन्हें न कोई बीमारी है और न कोई तकलीफ। उनका खाना बहुत ही साधारण है- केवल दूध-रोटी या दाल-रोटी। कोई भी मीठा या तीखा खाना नहीं और रात शाम को 8 बजे तक सो जाना।
प्रस्तुति: विनय सिंह
ढ़ती उम्र जब सांसों पर भारी पड़नी लगी हो 104 की उम्र में स्वतंत्रता सैनानी राम हर्ष सिंह आज भी उसी बिंदासपन व जिंदादिली और अपनी शर्तों पर जिंदगी बिता रहे हैं। उनके इस जज्बे और हौसले को देश में तो सम्मान मिला ही है, वे विदेश में भी पुरस्कृत हुए हैं। सबसे नया है पिछले महीने नाइजीरिया सरकार द्वारा मिला सम्मान। तीन महीने की यात्रा पर नाइजीरिया गए राम हर्ष ने पूरा देश घूमकर वहां देखा और वहां के लोगों को शुद्ध भारतीय जीवन-शैली के नुस्खे बांटे।
आजादी की लड़ाई के दौरान राम हर्ष सिंह 5 वर्ष जेल में बंद रहे। स्वतंत्रता सेनानी के तौर पर राष्ट्रपति द्वारा सम्मानित हो चुके हैं वे। साथ में कई अन्य पुरस्कारों के विजेता भी हैं। मूलत: बनारस के राम हर्ष इन दिनों मुलुंड में हैं।

राष्ट्रपति भवन में सम्मानित होते राम हर्ष सिंह।
उम्र के इस दौर में भी रोबीली मूंछों वाले सिंह का जोश युवाओं को मात देता है। खासकर क्रिकेट का शौक। पहला मौका मिलते ही अपने से पीढ़ियों छोटे लोगों के साथ वे जुट जाते हैं कलाइयों का जादू दिखाने। घूमने के शौक में भी कोई कमी नहीं है। जैसे-जैसे समय बीतता गया राम हर्ष और अधिक स्वतंत्र होते गए। किसी पर बोझ बने या उसका सहारा लिये बिना।
आज भी अपने सारे निजी काम वे स्वयं ही करते हैं और बहुत धैर्य और जिम्मेदारी से अपने सभी वादों को पूरा करते है। रोज सुबह 5 बजे उठेंगे और व्यायाम और योग करेंगे। आज इस उम्र में भी उन्हें न कोई बीमारी है और न कोई तकलीफ। उनका खाना बहुत ही साधारण है- केवल दूध-रोटी या दाल-रोटी। कोई भी मीठा या तीखा खाना नहीं और रात शाम को 8 बजे तक सो जाना।
प्रस्तुति: विनय सिंह
http://epaper.navbharattimes.com/details/24801-37586-2.html

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