Monday, June 2, 2014

साइकल पर सवार जुनून



           साइकल पर सवार जुनून

पचास हजार किलोमीटर से भी ज्यादा दूरी का साइकलिंग तजुर्बा रखनेवाले मुंबईकर सुमित पाटील इतिहास रचने से बस, अब एक कदम दूर हैं। साइकलिंग की दुनिया की सबसे कठिन रेस में से एक ‘रेस अक्रॉस अमेरिका (RAAM) के लिए उन्होंने क्वॉलीफाई कर लिया है। जून, 2014 में होनेवाली इस रेस में शिरकत करनेवाले प्रभादेवी के सुमित फिलहाल इकलौते भारतीय हैं। अलीबाग के 28 वर्षीय इस युवक ने मुंबई-दिल्ली, मुंबई-बेंगलुरू, मुंबई-गोवा, मुंबई-पुणे तक न जाने कितनी बार साइकलिंग की है।

12 दिन में तय करने हैं

4,800 किलोमीटर



33 वर्षों से हो रही रेस अक्रॉस अमेरिका यानी ‘रैम’ कैलिफोर्निया से शुरू होकर अन्नापोलिस में पूरी होगी। यह रेस 12 राज्यों से पहाड़ों के बीच और नदियों के किनारे से गुजरेगी जो किसी भी साइकलिस्ट के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण है। रैम में प्रतिभागियों को 12 दिन में 4,800 किलोमीटर साइकलिंग करनी होगी। अपनी जी तोड़ मेहनत के बल पर ही सुमित रेस के लिए विश्वास से भरे हैं। इससे पहले समीम रिजवी और किरण कुमार ने भारत की ओर से इस रेस के लिए क्वॉलीफाई किया था। किरण कुमार ने RAAM में अभी तक भाग नहीं लिया है। दूसरी तरफ समीम रिजवी ने हिस्सा तो कई बार लिया, लेकिन समय पर रेस खतम नहीं कर पाए।

रेस के लिए सुमित को करीब 40 लाख रुपये की दरकार है। स्पॉसंरशिप के लिए वे कई फाउंडेशन से मिल चुके हैं, पर हर जगह से निराश होकर लौटना पड़ा। रेस में रजिस्टर कराने के लिए ही 2.15 लाख रुपये लगते हैं। अमेरिका आना-जाना, अपनी साइकलिंग टीम के साथ वहां ठहरने आदि महत्वपूर्ण चीजों के लिए भी पैसों की आवश्यकता है। मदद के लिए सुमित और उनके दोस्त देश की बड़ी सी बड़ी कंपनी, सामाजिक संगठनों आदि के पास गुहार लगा चुके हैं। सुमित बताते हैं, ‘ज्यादातर जगहों से न सुनने को मिला। कुछ लोगों ने मदद के लिए हामी भरी है लेकिन अब तक साफ तौर पर कुछ नहीं कहा है।’ इस देश में क्रिकेट के अलावा यदि किसी दूसरे खेल की बात आती है तो हर कोई आंखें बंद कर लेता है। सुमित के अनुसार, ‘मेरे इस रेस की उम्मीद आर्थिक मदद पर ही टिकी हुई है। समय पर मदद मिलती है तो मुझे पूरा विश्वास है कि मैं अमेरिका में तिरंगा लहराने में कामयाब रहूंगा।’

"एक सीमा बाद लगातार साइकलिंग से लगता है पैर जड़ बन गए हैं, उस वक्त मन की शक्ति से आगे बढ़ना होता है।" -सुमित पाटील
प्रस्तुति: विनय सिंह



http://epaper.navbharattimes.com/details/25790-39030-1.html

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