Monday, June 2, 2014

अब आया साइकलिंग का जमाना

          अब आया साइकलिंग का जमाना


कुछ सालों पहले टीवी पर एक विज्ञापन आया था, जिसमें एक बच्चा अपने पिता से कहता है कि बड़ा होकर मुझे साइकल मकैनिक बनना है। बेटे की इस अजीब ख्वाहिश पर पिता ने सवाल किया तो छोटे से लड़के ने तर्क भरा जवाब दिया। लड़के का कहना था कि दुनिया में इतना पॉल्यूशन और ट्रैफिक हो गया कि भविष्य में लोग साइकल से यात्रा करेंगे। लेकिन कुछ लोग ऐसे भी है जिन्होंने साइकल को विकल्प बनाना शुरू ही नहीं किया, बल्कि उसके प्रचार में भी जुट गए हैं। प्रदूषण से परेशान और फिटनेस का मकसद लेकर भांडुप के गिरीश महाजन रोजाना चेंबूर तक अपने दफ्तर साइकल पर जाते हैं। गिरीश की तरह इस शहर में ऐसे कई उदाहरण मिल जाएंगे ने जिन्हें साइकलिंग ऐक्टिविस्ट कहा जाना चाहिए।

साइकल पर बैठकर मुंबई टु गोवा

डोंबिवली निवासी डॉ. सुनील पुणतांबेकर ने दो साल पहले डोंबिवली सिक्लिस्ट्स क्लब के नाम से एक ग्रुप की शुरुआत की थी। सुनील जी का ग्रुप हर साल के अंत में मुंबई से गोवा तक साइकल पर जाता है। इस सिक्लिस्ट्स क्लब में कुल 150 सदस्य है जो हर सप्ताह के अंत में पूरे डोंबिवली में साइकलिंग करते है। हर रविवार को डोंबिवली से बदलापुर, अंबरनाथ और टिटवाला जैसे आसपास के स्थानों पर ट्रिप का आयोजन करते हैं। साइकलिंग इनका जुनून है



-हृषिकेश यादव 1998 में माउंट एवरेस्ट पर पहले भारतीय सफल नागरिक अभियान के लीडर थे, जिन्होंने साइकलिंग प्रोग्राम की शुरुआत 2006 में की थी। इनके सिक्लिस्ट्स क्लब के 30 सिक्लिस्ट्स हर साल मुंबई से कोंकण जाते हैं। 

-हृषिकेश की तरह ही मुंबई के सचिन गाओंकर ने साइकलिंग में अनोखा रिकॉर्ड हासिल किया है। सचिन ने मनाली से लेह, अरुणाचल प्रदेश, मिजोरम तक साइकल पर लंबी टूर की है।

प्रस्तुति: विनय सिंह


http://epaper.navbharattimes.com/details/19954-39584-1.html


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