Monday, June 2, 2014

एटीएम से अवैध रूप से बेच रहे हैं पानी!

        एटीएम से अवैध रूप से बेच रहे हैं पानी!

मानखुर्द इलाके में एक एनजीओ अवैध रूप से बिना इजाजत एटीएम से पानी बेच रहे हैं। वंदना फाउंडेशन और अन्य NGO ने मिलकर पानी की एटीएम ‘एक्वाएटीएम’ मशीन लगाया है जिससे 1 रुपये में 1 लीटर पानी दिया जा रहा है। एटीएम से पानी बेचने की इस योजना को शुरू किए लगभग 2 महीने हो चुके हैं। इस मामले का जब बीएमसी अधिकारियों को पता चला, तो उनका कहना था कि हम ने वंदना फाउंडेशन को एटीएम से पानी बेचने की इजाजत नहीं दी है। इस पानी के एटीएम के द्वारा एक दिन में लगभग 1000 लीटर पानी लोगों को दिया गया।



एम-ईस्ट वॉर्ड ऑफिसर किरन दिघावकर ने बताया कि वंदना फाउंडेशन के कुछ लोग छह महीने पहले हमारे पास एटीएम से पानी बेचने की इजाजत मांगने आए थे, लेकिन हम ने उन्हें अभी तक ऐसी कोई भी मंजूरी नहीं दी है। मशीन लगाने और जहां तक पानी बेचने का सवाल है उसके लिए लाइसेंस की जरूरत होती है। दिघावकर ने जांच के बाद दोषियों पर कार्रवाई करने का आश्वासन दिया है। दूसरी ओर, अवैध रूप से पानी बेच रही वंदना फाउंडेशन का कहना है कि हमें बीएमसी से मंजूरी लेने की कोई आवश्यकता नहीं है। हमने सोसाइटी से बात करके वहां पर पानी की एटीएम मशीन लगाई है। इसमें बीएमसी का कोई रोल नहीं।

प्रस्तुति: विनय सिंह



http://epaper.navbharattimes.com/details/30712-37610-2.html

IIT-B स्टूडेंट्स का अचिवमेंट

IIT-B स्टूडेंट्स का अचिवमेंट

IIT-B के स्टूडेंट्स ने बाइक धोने की ऐसी मशीन तैयार की है, जो पांच मिनट में ही बाइक गाड़ी को साफ कर देता है। कम बिजली और पानी का इस्तेमाल किए बैगर इस मशीन से वाहन सफाई करने में दोनों की बचत होती है। गौरतलब है कि देश में बाइक अभी मैन्युअल रूप से धोया जाता है, जिसमें ज्यादा पानी और बिजली खर्च होता है और इसमें 20 मिनट से ज्यादा का वक़्त लगता हैं। इस मशीन का नाम एक्सप्रेस बाइक वॉश (EPW) है।



डोनेशन के पैसों से बनाई बाइक : EPW बनाने वाले मुंबई निवासी तीन स्टूडेंट्स जिगर वोरा, भूषण और करण भी बाइक के काफी शौकिन हैं। इनमें से दो IIT-B से ग्रैजुएट हैं, जबकि एक IIM इंदौर के एक्स स्टूडेंट हैं। EPW के बारे में इन स्टूडेंट्स ने बताया कि इसका जैसा नाम है, ठीक वैसा काम भी करता है। एक्सप्रेस बाइक वॉश को बनाने में 14 लाख रुपये खर्च हुए हैं, जो उन्हें उनके परिवार वालों ने डोनेट किया है।

इको-फ्रेंडली है मशीन : पर्यावरण के अनुकूल यह मशीन बिना रुके हुए हर पांच मिनट के अंदर पानी को रीसाइकल करता है। यह प्रक्रिया 24 घंटे तक चलती रहती है। मशीन की कार्य को टच स्क्रीन सिस्टम द्वारा संचालित है और इसे कोई अप्रशिक्षित व्यक्ति भी चला सकता हैं। इस मशीन की सबसे अच्छी बात यह है की ये बहुत कम पैसे में ज्यादा फायदा देती है। मशीन को सिर्फ पानी के साथ धोने में 2 मिनट, जबकि साबुन के साथ धोने में 2.5 मिनट लगते हैं और डी-ग्रीसर से धोने में 3.5 मिनट लगते हैं।

- विनय सिंह

http://epaper.navbharattimes.com/details/30723-40378-2.html

आईपीएल एक टच पर



            आईपीएल एक टच पर
आईपीएल 7 अपना आधा पड़ाव पूरा कर चूका है। चुनाव और परीक्षा समाप्त होने पर वॉट्सऐप ग्रूप, टेलिग्राम जैसे कई ठिकानों पर आईपीएल की चर्चा है। क्रिस लीन का कॅच देखा/ कितना लाजवाब कॅच था वो..... मलिंगा का क्लीन बोल्ड देखा/ ऐसे संवाद आज-कल सुनने को मिल रहे हैं। मात्र प्रत्येक आईपीएल मैच देखने के लिए टाइम मिलता होगा, कभी-कभी नहीं भी मिलता हैं। कभी सफर में होते है, तो कभी वीकेंड पे बाहर निकलना ऐसे मौके पर मैच देखना नहि मिलते है। अब के समय में विभिन्न एप्लिकेशन होने के कारन प्रत्येक मैच का बॉल टू बॉल अपडेट्स मिलता है। आयपीएल मैच सुरु होने के कारन इन एप्लिकेशन का बड़े पैमानें में उपयोग होते हुए दिख रह हैं। अगर आप सफर में हो या वीकेंड पर कहीं बाहर हो। आपके हाथ में स्मार्टफोन के टच स्क्रीन पर ऊँगली रखते लाइव्ह स्कोर का अपडेट मिलता हैं। ऐसे भी ऐप्लिकेशन है जिसमें एक से ज्यादा मैच देख सकते हैं। ऐसे ही कुछ ऐप्लिकेशन पे नजर डालते हैं।


क्रिकबझ क्रिकेट स्कोर ऐंड न्यूज:सभी एंड्रॉयड और टैबलेट यूजर क्रिकेट स्कोर के लिए सबसे बेहतरीन ऐप क्रिकबझ क्रिकेट स्कोर ऐंड न्यूज को माना जाता है। क्रिकेट स्कोर के लिए सबसे ज्यादा डाउनलोड होने वाला ऐप और एक सबसे उत्तम ऐप्लिकेशन है।

विशेष : फ्री टू डाऊन लोड, लाइव टेक्सट कॉमेन्टरी, होम स्क्रीन स्कोर कार्ड, भविष्य के मैचों का कैलेंडर।

याहू क्रिकेट

आपको सबसे अच्छे डिजाइन क्रिकेट स्कोर ऐप ढूंढना हैं तो आपके लिए याहू क्रिकेट ऐप से अच्छा कोई दूसरा विकल्प नहीं हैं। इस ऐप में आपको प्रत्येक IPL मैच के लाइव स्कोर मिलेंगे। क्रिकेट के वर्ल्ड रेकॉर्ड एक क्लिक पर मिल सकते हैं।

विशेष : फ्री टू डाउन लोड, ऐप के होमस्क्रीन पर लाइव स्कोर विंडो, लाइव टेक्सट कॉमेन्टरी, दुनिया भर की क्रिकेट ट्रेंड की जानकारी, सभी क्रिकेट टीमो और खिलाडीयों की प्रोफाइल्स।

ईएसपीएन क्रिकइंफो ऐप

क्रिकेट के सभी ऐप्स सबसे ज्यादा लोकप्रिय ऐप ईएसपीएन क्रिकइंफो। ईएसपीएन क्रिकइंफो ऐप में स्थानीय और अंतरराष्ट्रीय हर मैच के लाइव अपडेट मिलते हैं। इस ऐप में स्कोर के साथ में क्रिकेट से जुड़ी हर एक खबर होती हैं वो भी प्रत्येक टीम के। इस ऐप की सबसे बड़ी खासियत इसकी फोटो गैलरी सेक्शन और इस ऐप पर प्रत्येक खिलाड़ी, मैच के बारे आज तक की सारी जानकारी मिलेगी।

विशेष: फ्री टू डाउनलोड, बॉल टू बॉल लाइव कॉमेन्टरी, ऑडिओ और वीडिओ ब्रॉडकास्ट, ताजा खबरें और क्रिकेट रैंकिंग।

आईपीएल T20 2014 लाइव स्कोर

भले ही ये आईपीएल की ऑफिसियल ऐप हो या न हो लेकिन यहां पर अपडेट्स बहुत जल्दी मिलती है। इस ऐप पर आईपीएल के बारे में हर एक जानकारी मिलती है। ये ऐप बाकि सारे ऐप की तुलना में सबसे ज्यादा डाउनलोड किया जाने वाला ऐप है।

विशेष : इस आईपीएल के सारे शेड्यूल, मैच के बाद के ऑटो अपडेट्स, टेबल पॉइंटस्, टीमों के स्टॅटिस्टिक्स, सभी सहभागी खिलाड़ी की जानकारी।

बीसीसीआई आईपीएल ऐप

इस ऐप में आपको हर एक विकेट, टारगेट, सेंचूरी की जानकारी मिलती है। बीसीसीआई के साइट पर इस ऐप के बारे में कहा गया हैं कि अगर आपको आईपीएल के बारे में कोई भी जानकारी चाहिए तो इस ऐप को डाउनलोड करें। टीम इंडिया के प्रत्येक मैच का अपडेट या वो रणजी हो या कोई स्थानीय मैच हो सबके अपडेट यहां पर आपको मिलेंगे।

विशेष : टीम इंडिया के हर हलचल की खबर,प्रत्येक मैच की जानकारी, फोटो, ऐसे कई सारे मजेदार खबर इस ऐप पर मिलती है।

प्रस्तुति: विनय सिंह


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साइकल पर सवार जुनून



           साइकल पर सवार जुनून

पचास हजार किलोमीटर से भी ज्यादा दूरी का साइकलिंग तजुर्बा रखनेवाले मुंबईकर सुमित पाटील इतिहास रचने से बस, अब एक कदम दूर हैं। साइकलिंग की दुनिया की सबसे कठिन रेस में से एक ‘रेस अक्रॉस अमेरिका (RAAM) के लिए उन्होंने क्वॉलीफाई कर लिया है। जून, 2014 में होनेवाली इस रेस में शिरकत करनेवाले प्रभादेवी के सुमित फिलहाल इकलौते भारतीय हैं। अलीबाग के 28 वर्षीय इस युवक ने मुंबई-दिल्ली, मुंबई-बेंगलुरू, मुंबई-गोवा, मुंबई-पुणे तक न जाने कितनी बार साइकलिंग की है।

12 दिन में तय करने हैं

4,800 किलोमीटर



33 वर्षों से हो रही रेस अक्रॉस अमेरिका यानी ‘रैम’ कैलिफोर्निया से शुरू होकर अन्नापोलिस में पूरी होगी। यह रेस 12 राज्यों से पहाड़ों के बीच और नदियों के किनारे से गुजरेगी जो किसी भी साइकलिस्ट के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण है। रैम में प्रतिभागियों को 12 दिन में 4,800 किलोमीटर साइकलिंग करनी होगी। अपनी जी तोड़ मेहनत के बल पर ही सुमित रेस के लिए विश्वास से भरे हैं। इससे पहले समीम रिजवी और किरण कुमार ने भारत की ओर से इस रेस के लिए क्वॉलीफाई किया था। किरण कुमार ने RAAM में अभी तक भाग नहीं लिया है। दूसरी तरफ समीम रिजवी ने हिस्सा तो कई बार लिया, लेकिन समय पर रेस खतम नहीं कर पाए।

रेस के लिए सुमित को करीब 40 लाख रुपये की दरकार है। स्पॉसंरशिप के लिए वे कई फाउंडेशन से मिल चुके हैं, पर हर जगह से निराश होकर लौटना पड़ा। रेस में रजिस्टर कराने के लिए ही 2.15 लाख रुपये लगते हैं। अमेरिका आना-जाना, अपनी साइकलिंग टीम के साथ वहां ठहरने आदि महत्वपूर्ण चीजों के लिए भी पैसों की आवश्यकता है। मदद के लिए सुमित और उनके दोस्त देश की बड़ी सी बड़ी कंपनी, सामाजिक संगठनों आदि के पास गुहार लगा चुके हैं। सुमित बताते हैं, ‘ज्यादातर जगहों से न सुनने को मिला। कुछ लोगों ने मदद के लिए हामी भरी है लेकिन अब तक साफ तौर पर कुछ नहीं कहा है।’ इस देश में क्रिकेट के अलावा यदि किसी दूसरे खेल की बात आती है तो हर कोई आंखें बंद कर लेता है। सुमित के अनुसार, ‘मेरे इस रेस की उम्मीद आर्थिक मदद पर ही टिकी हुई है। समय पर मदद मिलती है तो मुझे पूरा विश्वास है कि मैं अमेरिका में तिरंगा लहराने में कामयाब रहूंगा।’

"एक सीमा बाद लगातार साइकलिंग से लगता है पैर जड़ बन गए हैं, उस वक्त मन की शक्ति से आगे बढ़ना होता है।" -सुमित पाटील
प्रस्तुति: विनय सिंह



http://epaper.navbharattimes.com/details/25790-39030-1.html

104 वर्ष का चिर युवा

             104 वर्ष का चिर युवा


ढ़ती उम्र जब सांसों पर भारी पड़नी लगी हो 104 की उम्र में स्वतंत्रता सैनानी राम हर्ष सिंह आज भी उसी बिंदासपन व जिंदादिली और अपनी शर्तों पर जिंदगी बिता रहे हैं। उनके इस जज्बे और हौसले को देश में तो सम्मान मिला ही है, वे विदेश में भी पुरस्कृत हुए हैं। सबसे नया है पिछले महीने नाइजीरिया सरकार द्वारा मिला सम्मान। तीन महीने की यात्रा पर नाइजीरिया गए राम हर्ष ने पूरा देश घूमकर वहां देखा और वहां के लोगों को शुद्ध भारतीय जीवन-शैली के नुस्खे बांटे। 

आजादी की लड़ाई के दौरान राम हर्ष सिंह 5 वर्ष जेल में बंद रहे। स्वतंत्रता सेनानी के तौर पर राष्ट्रपति द्वारा सम्मानित हो चुके हैं वे। साथ में कई अन्य पुरस्कारों के विजेता भी हैं। मूलत: बनारस के राम हर्ष इन दिनों मुलुंड में हैं।


राष्ट्रपति भवन में सम्मानित होते राम हर्ष सिंह।

उम्र के इस दौर में भी रोबीली मूंछों वाले सिंह का जोश युवाओं को मात देता है। खासकर क्रिकेट का शौक। पहला मौका मिलते ही अपने से पीढ़ियों छोटे लोगों के साथ वे जुट जाते हैं कलाइयों का जादू दिखाने। घूमने के शौक में भी कोई कमी नहीं है। जैसे-जैसे समय बीतता गया राम हर्ष और अधिक स्वतंत्र होते गए। किसी पर बोझ बने या उसका सहारा लिये बिना।

आज भी अपने सारे निजी काम वे स्वयं ही करते हैं और बहुत धैर्य और जिम्मेदारी से अपने सभी वादों को पूरा करते है। रोज सुबह 5 बजे उठेंगे और व्यायाम और योग करेंगे। आज इस उम्र में भी उन्हें न कोई बीमारी है और न कोई तकलीफ। उनका खाना बहुत ही साधारण है- केवल दूध-रोटी या दाल-रोटी। कोई भी मीठा या तीखा खाना नहीं और रात शाम को 8 बजे तक सो जाना। 

प्रस्तुति: विनय सिंह


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धारावी: लेदर का होलसेल मार्केट



धारावी: लेदर का होलसेल मार्केट

535 एकड़ में फैली झुग्गी झोपड़पट्टियों वाले धारावी शहर में लघु उद्योगों की पूरी मंडी ही बसी हुई है। यहां पर 10 लाख से भी ज्यादा लोग रहते हैं। धारावी पूरी एशिया में सबसे बड़ी झुग्गी झोपड़ियों की बस्ती के तौर पर फेमस है।

इस जगह को लोग अक्सर गंदगी के तौर पर ही जानते हैं। लेकिन अक्सर इस धारावी के बेहतरीन पहलू को लोग नजरअंदाज करते हैं या बाहर वालों को इसकी जानकारी ही नहीं होती है। यहां की गलियों में हजारों लघु उद्योग चलते हैं। इससे लाखों को रोजगार तो मिलता है, साथ ही देश की आर्थिक नगरी मुंबई की अर्थव्यवस्था को भी बल मिलता है। लेकिन यह शायद आंकड़ों में कम ही आ पाता है। हजारों मजदूर यहां दिन रात अलग - अलग काम धंधों में लगे रहते हैं। इन्हीं लघु उद्योगों से एक है धारावी की लेदर मार्केट।

धारावी मार्केट में दुकानें

जिन लोगों को धारावी के बारे में पता है उनके लिए, यहां की लेदर मार्केट कोई नई नहीं है। यहां पर्स, बेल्ट, जैकेट, हैंड बैग तक सब कुछ मिलता है। यहां लगभग 120 चमड़े की दुकानें है और 500 से भी अधिक चमड़े के कारखाने हैं। यहां की खास बात यह है कि आपको यहां 100% चमड़े की सामान मिलेगी। खास बात यह है कि यहां सारे आइटम असली चमड़े के बने होते हैं। नए रंग, नए डिजाइन और नए आकार में जैकेट, बेल्ट और पर्स के रुप में अन्य चमड़े के आइटम भी धारावी चमड़े मार्केट में बनाए जाते हैं और बेचे जाते है।



होलसेल की कीमत पर चमड़े के सामान:

यहां के दुकानदारों को अक्सर नॉर्मल कीमतों पर सामान बेचकर लाभ कमाते हैं। वहीं ग्राहकों को भी कम कीमत पर बेहतर सामान मिल जाता है। वहीं बाहर की मार्केट में वही सामान के लिए ज्यादा कीमत चुकानी पड़ती है। धारावी के एक दुकानदार फैजान शेख ने कहा यहां पर आपको कम कीमत में चमड़े का सामान मिल जाएगा और आप उसी प्रकार का सामान किसी और मार्केट से खरीदोगे तो आपको उसके लिए काफी पैसे देने होंगे। आप यहां के सारे चमड़े के सामान किसी भी मार्केट से तुलना कर लो आप को क्वॉलिटी में अच्छा सामान भी मिलेगा।

ठंड में चांदी

हर उद्योगों की तरह धारावी की दुकानें में भी तेज और धीमा सेल होता है। यहां की मार्केट सर्दियों के मौसम के दौरान सबसे व्यस्त रहती है। गर्मी और बारिश में मार्केट में धीमी रफ्तार से बिजनेस होता है। वैसे बाकी सीजन में भी काम भर का बिजनेस चलता रहता है। असली कमाई तो ठंड के सीजन में ही होती है।

असली चमड़ें का मार्केट:

यहां प्योर चमड़े से बने सामान मिलते हैं। बाहर कई बार आपको मार्केट में रेक्जीन का बना हैंड बैग मिल जाता है। वह नकली चमड़े का होता हैं। यहां के सामान की अच्छी क्वॉलिटी ही यहां की पहचान है। इसी वजह से कई बार यहां की मार्केट से सामान कई जगहों पर जाता है।

कॉलेज के बच्चों और विदेशी सेनानियों का मन पसंद मार्केट:

कॉलेज के युवा लड़के और लड़कियां को यहां पर उनके बजट में स्टाइलिश और नई डिजाइन वाले बैग मिल जाते हैं। युवा लड़के और लड़कियां यहां का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। विदेशी सैलानी को भी ये मार्केट बहुत लुभाता है। उन्हें भी यहां कम कीमत पर अच्छे चमड़े का सामान मिल जाता है। धारावी मार्केट सिर्फ आम लोगों के लिए नहीं हैं, यहां पर कई कंपनियां भी अपने एंप्लॉयी को गिफ्ट देने के लिए बैग लेते।

पर्स, बेल्ट, हैंडबैग, जैकेट समेत लेदर से बने अन्य सामान

120 से ज्यादा दुकानें

बैग, जैकेट 900 रुपये की रेंज से शुरू

कैसे पहुंचे : माहिम और सायन स्टेशन से चलकर पहुंचा जा सकता है।

फैजान शेख कहते हैं कि इस मार्केट में मैं पिछले 14 सालों से अपनी दुकान चला रहा हूं, मुझे यह कहते बड़ी खुशी होती है कि इस मार्केट में रईसों से लेकर गरीब सब आते हैं। यह सभी की मार्केट है।

प्रस्तुति - विनय सिंह



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इलेक्टॉनिक सामानों की मार्केट: लेमिंग्टन रोड

      इलेक्टॉनिक सामानों की मार्केट: लेमिंग्टन रोड

क्षिण मुंबई में डॉ. दादासाहेब भडकमकर मार्ग को लोग अक्सर लेमिंग्टन रोड नाम से जाना जाता है। लेमिंग्टन रोड ग्रांट रोड स्टेशन के बेहद करीब में स्थित है। इस बाजार का नाम 1903 और 1907 के बीच मुंबई के तत्कालीन गवर्नर लार्ड लेमिंग्टन के नाम पर रखा गया है। लेमिंग्टन रोड की मार्केट काफी व्यस्त होती है। यह मार्केट इलेक्ट्रॉनिक्स वस्तुओं के लिए पूरे मुंबई में प्रसिद्ध है। इस बाजार में दुकानों में और सड़क पर दुकान लगाकर कंप्यूटर के सामान, इलेक्ट्रॉनिक सामान, टेलीविजन उपकरण और वायरलेस उपकरण बेचे जाते है। लेमिंग्टन बाजार के पास एक बहुत प्रसिद्ध साईबाबा का मंदिर है जिसे लोग ‘साईधाम’ के नाम से जानते है। इस बाजार को आईटी हब भी कहा जाता है। इस मार्केट में होलसेल का काफी काम होता है, रिटेल वालों को भी जगह मिलती है।



सस्ते इलेक्ट्रॉनिक सामान का बाजार

लेमिंग्टन बाजार की स्थापना 1903 और 1907 के बीच मुंबई के गवर्नर लार्ड लेमिंग्टन ने की थी। उन्हीं के नाम से इसका नाम लेमिंग्टन रोड मार्केट भी पड़ा था। बाजार में कंप्यूटर के सामान, इलेक्ट्रॉनिक सामान, टेलीविजन के पार्ट्स और वायरलेस के सामान मिलते है। आप पूरी मुंबई की तुलना में सबसे सस्ता कंप्यूटर के सामान और सारे इलेक्ट्रॉनिक सामान मिलते है। यहां आपको बजट में अच्छे और गारंटी वाले इलेक्ट्रॉनिक सामान मिलेंगे। इस बाजार से तमाम लोकल मार्केट वाले सामान खरीदते हैं। 

पुराने सामानों का गढ़:

इस बाजार की खासियत यह भी है यहां पर आपको नए सामानों के साथ पुराने सामान भी मिल सकते हैं। ट्रांजिस्टर, केबल, साउंड कार्ड, कैपेसिटर्स, टीवी ट्यूनर और एडेप्टर जैसे इलेक्ट्रॉनिक पार्ट्स के साथ कंप्यूटर से संबंधित हर सामान यहां आसानी से मिलते हैं। ऐसे सामान जिसका शायद कई दुकानदार नाम भी नहीं जानते होंगे। लोग अपने पुराने पार्ट्स की तलाश में इस मार्केट में आते हैं। 

तोल मोल के बोल

इस बाजार में वैसे सस्ते सामान मिलते है, लेकिन भाव करना आना चाहिए। यदि यह कला आप में हैं तो भी तो चांदी ही चांदी। नहीं तो यहां के दुकानदार अपने रेट आसामान के ही बताते हैं। इस बाजार में आपको बाहर की तुलना में काफी सस्ते दामों पर सामान मिलता है। इसके साथ ही सभी सामान भी मिल सकते हैं। यहां दुकान लगाने वाले विष्णु सिंह कहते हैं कि यहां पर हर रोज कई लोग आते है इलेक्ट्रॉनिक, कंप्यूटर के सामान लेने और बहुत लोग सिर्फ भाव जानने के लिए आते है। लेमिंग्टन बाजार की खासियत यहां बिकने वाली वस्तुएं हैं, जैसे की पुराने इलेक्ट्रॉनिक सामान जो लोगो को आकर्षित करता हैं। इस बाजार में मैं पिछले कई सालों से व्यापार कर रहा हूं, यहां पर साल दर साल भीड़ बढ़ती जा रही है। वहीं, इस बाजार में 25 साल से जुड़े कृष्णा शर्मा कहते हैं कि पहले इस बाजार में मेरे पिताजी व्यापार करते थे आज मैं व्यापार कर रहा हूं। पहले के मुताबिक लेमिंग्टन बाजार का कारोबार बहुत आगे बड़ गया है।

कंप्यूटर से लेकर इलेक्टॉनिक्स से जुड़े नए- पुराने सामान।

कहां है स्थित
ग्रांट रोड स्टेशन (वेस्ट) में स्टेशन से 5 मिनट की दूरी पर।

प्रस्तुति: विनय सिंह


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